मानव का पतन व उत्थान
मनुष्य को इस पृथ्वी पर सबसे बुद्धिजीवी जीव माना गया है क्योंकि मनुष्य को ही परमेश्वर ने अपने स्वरूप जैसा बनाया तथा बताया कि मनुष्य ही सभी अन्य जीवो पर अधिकार रख सकता है उन्हें अपने वश में कर सकता है ।
सतयुग से लेकर आज वर्तमान कलयुग तक हम यूं कहें कि मानव ने बहुत विकास किया है जबकि हम गौर करके देखें और सोचे व समझे तो हम यह पाएंगे कि अगर मानव का उत्थान भौतिक रूप से हम देखे तो मानव ने बहुत तरक्की की है लेकिन वास्तव में क्या मानव ने तरक्की की है ?
क्या वास्तव में मानव का उत्थान हुआ है ?
यह एक सोचने की बात है ।
वास्तव में हम देखें तो मानव का उत्थान नहीं हुआ है बल्कि मानव धीरे-धीरे अपने पतन की ओर जा रहा है ।
सतयुग से लेकर आज तक मानवता में गिरावट देखने को मिली है । आज मानव
नशा, चोरी,
जारी,
रिश्वतखोरी,
भ्रष्टाचार, भ्रूणहत्या ,
दहेज प्रथा आदि बुराइयों में लिप्त है।
ऐसा नहीं है कि समाज पूरा ही बुरा है समाज में कुछ लोग भी हैं जो सच्चाई के रास्ते पर चल रहे हैं लेकिन वह केवल ना के बराबर हैं।
मानवता में यह गिरावट समय के अनुसार बदलती गई इसका कारण हम देखें तो यह है कि लोगों के विचार बदलते गए हैं और सबसे बड़ी बात यह है कि लोगों का धार्मिकता से लगाव कम होता गया और भौतिकवाद में मानव बढ़ता गया और इस भौतिकवाद के चक्कर में मानव आध्यात्मिकता से दूर हो गया और अपने पतन की ओर बढ़ता गया आज मानव चाहे कितना ही पैसे वाला हो,
चाहे बड़े रुतबे वाला हो उसे मानसिक रूप से शांति नहीं है और यह मानसिक शांति आध्यात्मिकता से ही मिल सकती है ।
आज पैसों की भागदौड़ में मानव ना जाने अनगिनत बुरे कर्म किए जाता है अगर उसे कोई सच्चा मार्गदर्शक मिले तो उसकी यह भागदौड़ समाप्त हो जाए और उसका फिर से उत्थान होने लगे
आखिर फिर मानव कल्याण कैसे हो ।
मानव का उत्थान धार्मिकता को अपनाकर ही हो सकता है और वो भी सत्य । क्योंकि जब से मानव धार्मिकता से अलग हुआ है वह अपने पतन की ओर बढ़ा है और अगर हम गौर करे और जाने हतो मानव में धार्मिकता बढ़ती हुई भी दिखाई दे रही है जिसका कारण एक संत के आध्यात्मिक ज्ञान का प्रभाव है आज वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज एक ऐसे संत हैं जो मानव में सोए हुए देवत्व को जगा रहे हैं और आध्यात्मिकता को उनमें प्रबल कर रहे हैं जिसके परिणाम स्वरूप मानव बुराइयों से कोसों दूर जा रहा है और एक नेक मानव के साथ-साथ एक देव की भूमिका स्वरूप भी बन रहा है
आज संत रामपाल जी महाराज जी के ही शिष्य ऐसे हैं जो किसी प्रकार का नशा, भ्रूण हत्या, दहेज प्रथा , मृत्यु भोज, भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी आदि बुराइयों से कोसों दूर रहते हैं तथा शास्त्रानुकूल भगति कर रहे है जिसका समाज में बहुत ही गहरा प्रभाव पड़ रहा है और इसी तरह से मानव का उत्थान संभव हो सकता है वास्तव में मानव पूर्ण रूप से तभी सफल हो सकता है जब तक इस जीव को पूर्ण परमात्मा द्वारा बताए गए भक्ति मार्ग से
जन्म और म्रत्यु
का यह दीर्घ रोग नहीं समाप्त होगा तब तक मानव को शांति नहीं मिल सकती और इस समाप्त केवल आज वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज जी मिटा सकते हैं इनके पास वह अनमोल भक्ति मार्ग व भक्ति मंत्र है जिससे मानव पूर्ण मोक्ष को प्राप्त होगा और उस स्थान को चला जाएगा जहां जाने के बाद संसार में वापस लौट कर नहीं आते ।
जिसके बारे में गीता अध्याय नंबर 18 के श्लोक 62 व 66 में भी स्पष्ट वर्णन है अतः आप भी संत रामपाल जी महाराज जी से नाम उपदेश लेकर अपना कल्याण करवाएं ।
”आत्म प्राण उद्धार ही, ऐसा धर्म नहीं और।
कोटि अश्वमेघ यज्ञ, सकल समाना भौर।।“
जीव उद्धार परम पुण्य, ऐसा कर्म नहीं और।
मरूस्थल के मृग ज्यों, सब मर गये दौर-दौर।।
आप सन्त जी के मंगल सत्संग प्रवचन जरूर सुने और विचार करें कि वास्तव में संत रामपाल जी महाराज ही एकमात्र ऐसे संत हैं जो शास्त्रानुकूल ज्ञान दे रहे है जिससे सर्व मानव समाज का कल्याण हो सकता है।
सत्संग के लिये देखे रोजाना साधना tv रात्रि 7:30 से 8:30 तक।
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